अक्सर आज कल लोगो को सेक्स एजुकेशन पर बहस करते सुना है। कुछ लोगो का कहना है की ये जरुरी कुछ इसके बिल्कुल भी पक्ष में नहीं हैं. लोगो का ये मन है की बच्चे इससे सही ज्ञान अर्जित करने के बजाये बिगड़ रहे हैं. मैं ने सुना है की किसी राज्य सरकार के द्वारा सेक्स एजुकेशन को इण्टर तक के विद्यार्थियों के लिए जरुरी करने के बाद जब राज्य सरकार ने इसे लागू किया तो कोहराम मच गया अनेक अविभावकों के आलावा महिला टीचर्स ने पुरजोर विरोध . किया। वास्तव में मेरी राय में सेक्स एजुकेशन के बजाये फिजिकल एजुकेशन की शिक्षा दी जानी चाहिए। इससे दोनों समस्या का हल मिल जायेगा। शारीरिक शिक्षा के आलावा सेक्स एजुकेशन भी मिल जायेगा१२ वर्ष से लेकर १५ वर्ष तक के बच्चों के लिए शारीरिक शिक्षा में यौन संरचना , उत्तम स्वस्थ्य के लिए लड़को को वीर्य की रक्षा और लड़कियों को कौमार्य की रक्षा का ग्यान दिया जाना अनिवार्य बनाना होगा। लड़कियों को ,लड़को को भ्रमित करने के बजाये सही ढंग से ,बताना होगा की सेक्स अंगो के कार्य विधि , शिशु जन्म की प्रक्रिया , क्या और कैसे है. अनावश्यक एवम अनुचित रूप से यौन अंगो का दुरुपयोग न करें ,यह बताना जरुरी होगा। खेल कूद से अनावश्यक यौन कुंठाओं में कमी आती है यह बताना जरूरी होगा. शेष बाद मेंबात करेंगे। …………
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें